करुणा (Compassion)
• निस्वार्थ भाव: करुणा वह भाव है जहाँ आप दूसरों के दुख को देखकर उसे दूर करने के लिए भीतर से निस्वार्थ भाव से पिघल उठते हैं।
• शुद्ध आत्मिक जुड़ाव: यह इस सत्य को जान लेना है कि संसार के सभी जीवों में दुख-सुख एक समान हैं।
• दिव्य आनंद का जागरण: यह भाव सीधे आनंदमय कोष को जाग्रत करता है। दूसरों की सेवा करने में एक अगाध, अटूट और शाश्वत आनंद (Divine Bliss) मिलता है, जो किसी बाहरी साधन पर निर्भर नहीं होता।
• शुद्ध विवेक का उदय: बुद्धि स्वार्थ, चालाकी और तुलना की भावना से ऊपर उठकर सबके भले (सर्वजन हिताय) के बारे में सोचने लगती है।
• निर्मल बुद्धि: बुद्धि अत्यंत निर्मल हो जाती है। मस्तिष्क में हीलिंग तरंगें (Healing Waves) सक्रिय होती हैं, जिससे मनुष्य का सही समय पर सही निर्णय लेने का विवेक हमेशा जाग्रत रहता है।
• सहानुभूति का रस: मन में प्रत्येक जीव के प्रति सहानुभूति, क्षमा, दया और प्रार्थनाओं का रस घुलने लगता है।
• गहरी मानसिक शांति: मन में एक अगाध शांति और संतोष का संचार होता है। मस्तिष्क में तुरंत Serotonin और Dopamine जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का स्राव होता है, जो पुराने मानसिक आघातों (Trauma) को धोकर गहरी मानसिक शांति देता है।
• नाड़ियों का शुद्धिकरण: करुणा के पावन भाव से शरीर की बहत्तर हजार (72,000) नाड़ियाँ शुद्ध होकर स्वतः ही हीलिंग मोड में आ जाती हैं।
• हृदय चक्र की ऊर्जा: सांसें अत्यंत कोमल, धीमी और गहरी हो जाती हैं। हृदय चक्र (Anahata) से सुनहरी हीलिंग ऊर्जा प्रवाहित होने लगती है, जो न केवल स्वयं की ऊर्जा बढ़ाती है बल्कि अपने आस-पास के वातावरण को भी शुद्ध कर देती है।
• भौतिक परत पर प्रभाव: करुणा की यह हीलिंग ऊर्जा जब सबसे बाहरी भौतिक परत (Physical Body) में प्रवेश करती है, तब आँखों में दया और करुणा का दिव्य भाव झलकता है। इस भाव में जीने वाले व्यक्ति का शरीर हमेशा ऊर्जावान रहता है।